कोशिश करते रहना….

एक गंतव्य तक आज पहुंच
चुका हूं,अब उस गंतव्य से एक नए
गंतव्य तक का सफ़र तय करना
है जहां मेरी मंज़िल मेरे इंतज़ार में
राह को निहार रही है,
जानता हूं कि फ़िर से एक नए सफ़र
पर सामना नई मुश्किलों से होगा,
वाक़िफ है मुश्किलें हैं तो कहीं-न-कहीं उनसे
टकराने पर नीचे भी गिरूंगा,
पर अब ये सीख चुका हूं कि आसमां को वोही
पंछी छूते हैं जो शुरुआती कोशिशों में अक्सर
गिरते-पड़ते कुछ सीखते हुए अपनी
उड़ान ऊंची भरने की कोशिश अंत तक करते
हैं,
जब-जब गिरूंगा मैं फ़िर उठ आगे बढ़ चलूंगा,
एक नई सीख के साथ,एक नई उमंग के साथ,
मैं कोशिश अपनी मंज़िल तक पहुंचने की
करता रहूंगा, कोशिश करता रहूंगा । …

मंज़िल की ओर बढ़ते चलो, सीखते चलो ।….